
मैं दुखी हूँ सब ये कहते हैं, ख़ुशी की बात है.
अब अंधेरो की ज़बा पर रौशनी की बात है.
मुद्दतों पहले जुदा हम अपनी मर्ज़ी से हुए,
लग रहा है दिल को यूँ जैसे अभी की बात है.
हमने जब भी दास्ताँ-ए-शौक छेड़ी दोस्तों,
हर किसी को ये लगा जैसे उसी की बात है.
खामोशी ने किसलिए आवाज़ का पीछा किया,
अहले दुनिया तुम न समझोगे ये ऐसी बात है.
शहर में एक शख्स ऐसा है जो सच के साथ है,
पर तुम इसे क्यूँ सुन रहे हो ये तो दिल्लगी की बात है.......


1 comment:
:( :'( :'(
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